कतर को लेकर अरब देशों में तनातनी, जानें- क्या होगा लाखों भारतीय कामगारों का

अंतरराष्ट्रीय संबंध कभी भी एक जैसे नहीं रहते। तात्कालिक और दीर्घकालीन जरूरतों के मुताबिक देश आपसी रिश्तों को तवज्जों देते हैं। कुवैत और इराक के आपसी खींचतान के असर को दुनिया देख चुकी है। आज एक बार फिर अरब देशों में कुछ वैसा ही माहौल बन रहा है। आतंकी संगठनों के साथ कतर के रिश्ते को लेकर छह अरब देशों ने उसपर प्रतिबंध लगा दिया है। लेकिन अरब देशों की जो तस्वीर सामने आ रही है वो भारत के लिए चिंताजनक है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों को पूरा करने के लिए जहां सऊदी अरब से कच्चा तेल मंगाता है, वहीं कतर से प्राकृतिक गैस की आपूर्ति होती है। लेकिन विदेश मंंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि अरब देशों के बीच तनाव से भारत अछूता रहेगा।

भारत के लिए परेशानी की वजहें

-कतर में करीब 6.5 लाख भारतीय काम करते हैं। ये संख्या कतर के मूल लोगों से ज्यादा है। एक आंकड़े के मुताबिक भारतीयों और मूल कतर के लोगों 2:1 का अनुपात है।

-कच्चे तेल और गैस की कीमतों में बढ़ोतरी से महंगाई में इजाफा हो सकता है।

-खाड़ी में उभरा तनाव भारत की ऊर्जा सुरक्षा को नुकसान पहुंचा सकता है।

-खाड़ी देशों में कार्यरत लाखों भारतीयों के रोजगार पर पड़ सकता है असर।

-नये हालात में कूटनीतिक तालमेल बैठाने की होगी चुनौती।

कतर ने कहा फैसला गलत

कतर ने पांच बड़े खाड़ी देशों के फैसले को आधारहीन और न्याय के विरुद्ध करार किया है।दोहा की ओर से कई बार कहा जा चुका है कि वह आतंकी संगठनों को किसी तरह की मदद मुहैया नहीं कराता है।ईरान के अनुसार इसकी साजिश अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के सऊदी दौरे के समय ही तैयार कर ली गई थी। अमेरिका ने कहा है कि अरब देशों को मिलजुलकर मामले को सुलझाने के लिए आगे आना चाहिए। कतर में अमेरिका का एक बड़ा सैन्य अड्डा है जिसमें 10 हजार से ज्यादा सैनिक तैनात हैं। अमेरिकी विदेश मंत्री रेक्स टिलरसन ने कहा कि पांच देशों के फैसले से आतंकवाद के खिलाफ लड़ाई में किसी तरह का असर नहीं पड़ेगा।
खाड़ी देशों में भारतीय कामगारों की एक बड़ी संख्या

खाड़ी के देशों में सबसे ज्यादा भारतीय कामगार हैं। संयुक्त अरब अमीरात में करीब 26 लाख और सऊदी अरब में करीब 30 लाख कामगार हैं। कतर में पांच लाख से ज्यादा भारतीय काम करते हैं। खाडी देशों में काम करने वाले भारतीय बड़ी मात्रा में विदेशी मुद्रा भेजते हैं। अगर खाड़ी के देशों में तनाव बढ़ता है तो भारतीय कामगारों पर असर पड़ेगा जिससे अर्थव्यस्था भी प्रभावित होगी। हालांकि विदेश मंत्री सुषमा स्वराज का कहना है कि ये पहला मौका नहीं है जब खाड़ी देशों में इस तरह के माहौल का निर्माण हुआ हो।

जानकार की राय

Jagran.com से खास बातचीत में विदेश मामलों के जानकार डॉ एच सी सिंह ने कहा कि इसमें कोई शक नहीं है कि अरब देशों के बीच तनातनी से अफरातफरी का माहौल बनेगा। लेकिन बड़े परिप्रेक्ष्य में अभी कोई खास असर नहीं होगा। भारत सरकार को सऊदी अरब और कतर की सरकार के साथ लगातार संपंर्क में बने रहना चाहिए।

कच्चे तेल और गैस के महंगा होने का डर

भारत सबसे ज्यादा कच्चा तेल जहां सऊदी अरब से लेता है, वहीं सबसे ज्यादा प्राकृतिक गैस कतर से लेता है। तनाव बढ़ने की वजह से कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी होने की वजह से आम भारतीय ग्राहक समेत पूरी अर्थव्यवस्था प्रभावित होगी। पिछले तीन वर्षों से कच्चे तेल के दामों में स्थिरता की वजह से भारत को फायदा मिला है।मोदी सरकार ने अरब देशों के साथ संबंधों को मजबूत करने की दिशा में व्यापक पहल की है। ईरान के साथ साथ भारत सऊदी अरब से अपने संबंधों को प्रगाढ़ करने में जुटा हुआ है।

क्या है मामला

सोमवार को लीबिया के अलावा पांच अरब देशों ने कतर के साथ अपने राजनयिक समेत सभी तरह के संबंधों को खत्म कर दिया। आतंकियों को संरक्षण देने का हवाला देते हुए बहरीन, मिस्र, सऊदी अरब, संयुक्त अरब अमीरात, यमन और लीबिया ने कतर से संबंध तोड़ लिये।
तनाव की शुरूआत

कतर और दूसरे अरब देशों के बीच 2013 से ही तनाव के हालात बने हुए थे। 2013 में मिस्र के इस्लामिक राष्ट्रपति मोहम्मद मोर्सी को सेना ने अपदस्थ कर दिया था। कतर मोहम्मद मोर्सी का समर्थक था जो चरमपंथी संगठन मुस्लिम ब्रदरहुड का सदस्य था। मोर्सी पर आरोप था कि उसने मिस्र के खुफिया दस्तावेजों को कतर को सौंपे थे। मोर्सी को कतर द्वारा समर्थन मिलने की वजह से 2014 में संयुक्त अरब अमीरात और बहरीन ने कतर से अपने राजदूतों को स्वदेश बुला लिया था।करीह साढ़े 11 हजार वर्ग किमी और 27 लाख की आबादी वाले देश कतर पर आरोप है कि वो मुस्लिम ब्रदरहुड चरमपंथी इस्लामिक समूह को समर्थन देता है। अरब देश जिसका विरोध लंबे अर्से से कर रहे थे। हाल ही में कतर के अमीर शेख तमीम बिन हमद अल थानी के विवादास्पद बयान के बाद यह विवाद गहरा गया।

एक बयान से बिगड़ी बात

करीब दो हफ्ता पहले कतर के अमीर ने कहा था कि खाड़ी देश और अमेरिका ईरान के खिलाफ सख्ती दिखा रहे हैं। ऐसा माना जाता है कि ईरान के साथ कतर की नजदीकी अमेरिका और सऊदी अरब को नागवार लग रही थी।
सऊदी अरब और ईरान के रिश्ते कभी सामान्य नहीं रहे। 27 मई को ईरानी राष्ट्रपति द्वारा चुनाव जीतने के बाद जब कतर के अमीर ने उन्हें बधाई दी तो ये बात सऊदी अरब को चुभ गई।बताया जाता है कि कतर फिलीस्तानी सुन्नी इस्लामिक संगठन हमास का भी प्रमुख आर्थिक संरक्षक है। सीरिया में नुसरा फ्रंट जैसे सुन्नी आतंकी संगठनों को पोषित करने का आरोप भी कतर पर लगाया जाता है।

प्रतिबंध से कतर पर असर

खाद्य सुरक्षा एक बड़ा मुद्दा है। हर रोज सऊदी अरब कतर को खाद्य सामग्री भेजता है। कतर की करीब 40 फीसद जरूरतों को सऊदी अरब पूरी करता है।कतर में 2022 के फुटबॉल विश्वकप के लिए आठ स्टेडियमों का निर्माण कार्य चल रहा है। कंक्रीट और स्टील का एक बहुत बड़ा हिस्सा सऊदी अरब के रास्ते आता है। छह देशों के लोग न तो कतर में रह सकेंगे। न वहां घूमने जा सकेंगे या फिर वहां से होकर कहीं और जा सकेंगे। लोगों को कतर से वापस आने के लिए 14 दिन का समय दिया गया है।सभी छह देशों द्वारा कतर एयरवेज के लिए अपना हवाई क्षेत्र बंद करने की वजह से न सिर्फ लोगों को कहीं जाने में अधिक समय लगेगा बल्कि इसके लिए ज्यादा खर्च भी करना होगा।

 

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