चोरी के आरोप में 4 महिलाओं को निर्वस्त्र कर भीड़ ने पीटा, परेड भी निकाली

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Image Source : GOOGLE MAPS
पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लोगों के एक ग्रुप ने दुकान से चोरी करने का आरोप लगाकर 4 महिलाओं कपड़े उतार दिए।

Highlights

  • पाकिस्तान में लोगों की भीड़ ने दुकान से चोरी करने का आरोप लगाकर एक किशोरी सहित 4 महिलाओं कपड़े उतार दिए।
  • महिलाओं को रोते हुए और लोगों से उन्हें जाने देने का अनुरोध करते देखा गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।
  • घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंजाब पुलिस हरकत में आई।

लाहौर: पाकिस्तान के पंजाब प्रांत में लोगों की भीड़ ने दुकान से चोरी करने का आरोप लगाकर एक किशोरी सहित 4 महिलाओं कपड़े उतार दिए और सड़क पर घसीट कर उनसे मारपीट की। घटना सोमवार को लाहौर से करीब 180 किलोमीटर दूर फैसलाबाद में हुई। सोशल मीडिया पर सामने आए वीडियो में एक किशोरी सहित 4 महिलाओं को अपने आस-पास के लोगों से विनती करते हुए देखा गया कि उन्हें बदन ढकने दें लेकिन उन्हें लाठियों से पीटा गया। महिलाओं को रोते हुए और लोगों से उन्हें जाने देने का अनुरोध करते देखा गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ।

वीडियो वायरल होने के बाद हरकत में आई पुलिस


रिपोर्ट्स के मुताबिक, महिलाओं की एक घंटे तक सड़कों पर निर्वस्त्र परेड कराई गई। घटना के कुछ वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद पंजाब पुलिस हरकत में आई। पंजाब पुलिस के एक प्रवक्ता ने मंगलवार को एक ट्वीट में कहा, ‘हमने इस दुर्भाग्यपूर्ण घटना के संबंध में 5 लोगों को गिरफ्तार किया है।’ उन्होंने कहा कि पुलिस मामले की जांच कर रही है और इसमें शामिल सभी आरोपियों को न्याय के कटघरे में लाया जाएगा। कानून के संबंधित प्रावधानों के तहत 5 संदिग्धों और कई अन्य के खिलाफ प्राथमिकी दर्ज की गई है।

‘हमें निर्वस्त्र कर घसीटा और मारपीट की’

मामले के अनुसार, पीड़िताओं ने बताया कि वे फैसलाबाद के बावा चक बाजार में कूड़ा उठाने गई थीं। शिकायत में महिलाओं ने कहा है, ‘हमें प्यास लगी थी और उस्मान इलेक्ट्रिक स्टोर के अंदर गए और पानी की बोतल मांगी। लेकिन इसके मालिक सद्दाम ने हम पर चोरी करने के इरादे से दुकान में घुसने का आरोप लगाया। सद्दाम और अन्य लोगों ने हमें पीटना शुरू कर दिया। फिर उन्होंने निर्वस्त्र कर घसीटा और मारपीट की। उन्होंने निर्वस्त्र करने के बाद हमारे वीडियो भी बनाए। भीड़ में से किसी ने भी इस अत्याचार को रोकने के लिए दोषियों को रोकने की कोशिश नहीं की।’

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