छोटे-छोटे ग्रुप में 300 नक्सलियों ने किया CRPF टीम पर हमला, जानें- सुकमा अटैक की INSIDE STORY

छत्तीसगढ़ के सुकमा में नक्सलियों ने इस दशक के सबसे घातक हमले को अंजाम दिया है. माओवादियों ने इस बार भी हुजूम में अचानक हमला करने की रणनीति अपनाई. हमले की जगह और वक्त चुनने वाले खुद नक्सली थे. आपको बताते हैं कैसे हुआ हमला:

1) सोमवार को सुबह करीब 8.30 बजे सीआरपीएफ की 74वीं बटालियन के 99 जवान दुर्गापाल कैंप से रवाना हुए. चिंतागुफा पहुंचने के बाद ये जवान दो समूहों में बंट गए. इन्हें इलाके में चल रहे सड़क निर्माण प्रोजेक्ट के लिए रास्ते की कॉम्बिंग का काम सौंपा गया था.

2) इन जवानों को भनक नहीं थी कि चिंतागुफा-बुर्कापाल-भेजी इलाके के करीब 300-400 नक्सली यहां घात लगाए बैठे हैं. खबरों के मुताबिक इनमें से करीब 150 नक्सली लड़ाका समूहों का हिस्सा थे. नक्सलियों ने छोटे दल बनाए और दोपहर करीब 12.25 बजे हमले की शुरुआत एक आईईडी ब्लास्ट से हुई. इसके बाद नक्सलियों ने जवानों पर अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी.

3) हमले में एके-47 जैसे आधुनिक हथियारों का इस्तेमाल किया गया. सीआरपीएफ के मुताबिक हमलावरों की अगुवाई हिडमा नाम का नक्सली नेता कर रहा था.

4) सूत्रों के मुताबिक हमला शुरू होने के कुछ देर बाद महिला नक्सलियों का दल भी कार्रवाई में शामिल हो गया. ये महिला आतंकी 12 मार्च को सीआरपीएफ जवानों से लूटे गए हथियारों से लैस थीं.

5) सीआरपीएफ के जवानों ने जवाबी कार्रवाई की. कई नक्सली उनकी गोलियों का निशाना बने. हालांकि अब तक इस बात की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है.

6) हमले में घायल सीआरपीएफ जवान शेर मोहम्मद ‘नक्सलियों ने पहले स्थानीय गांववालों को हमारी लोकेशन का पता लगाने के लिए भेजा. इसके बाद करीब 300 नक्सलियों ने धावा बोल दिया. हम संख्या में उनसे आधे थे. फिर भी हमने जवाबी फायरिंग की. मैंने करीब 3-4 नक्सलियों को छाती में गोली मारी.’ एक अन्य जवान के मुताबिक ‘मैंने कई महिला नक्सलियों को भी देखा. वो काली वर्दी में थीं और आधुनिक हथियारों से लैस थीं. सीआरपीएफ के जवाबी हमले में करीब 10-12 नक्सली मारे गए हैं.’

7) नक्सली शहीद जवानों से दर्जनों हथियार लूट गए. शहीदों में कंपनी कमांडर रघुबीर सिंह भी शामिल हैं.

8) कुछ देर बाद जगदलपुर में तैनात भारतीय वायुसेना की एंटी-नक्सल टास्क फोर्स को हमले की इत्तला मिली. इसके बाद Mi-17V5 हेलीकॉप्टरों को फौरन मौके पर रवाना किया गया ताकि घायलों को अस्पताल पहुंचाया जा सके. पहले तीन जवानों के घायल होने की खबर थी. लेकिन बाद में पता चला कि कुल 7 जवान जख्मी हुए हैं. इन सभी को इलाज के लिए रायपुर लाया गया. रास्ते में एक और जवान शहीद हो गए.

8) इसी दौरान हेलीकॉप्टर चालकों को आदेश मिला कि बुर्कापाल से 24 शहीद जवानों के शव लाए जाएं. हेलीकॉप्टरों को इस काम के लिए शाम के अंधेरे के बावजूद इलाके में उतारा गया. वहां पहुंचने पर 25 जवानों के शवों को रायपुर में पोस्टमॉर्टम के लिए लाया गया.

9) इसके बाद सीआरपीएफ की 150वीं बटालियन और 206 कोबरा बटालियन ने कॉम्बिंग अभियान शुरू किया.

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