GDP के साथ हैपीनेस में भी ग्लोबल पावर बने भारत: प्रणव मुखर्जी

बेंगलुरु
राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने शुक्रवार को जोर दिया कि भारत को न केवल आर्थिक मानदंडों पर बल्कि ‘सकल राष्ट्रीय सुख’ (ग्रॉस नैशनल हैपीनेस) के पैमाने पर भी ग्लोबल पावर बनने का प्रयास करना चाहिए। बेंगलुरु में डॉ. बीआर आंबेडकर स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स की आधारशिला रखने के बाद मुखर्जी ने कहा, ‘यदि हम दुनिया की एक आर्थिक ताकत बनने की आकांक्षा रखते हैं, तो हां, हम बन सकते हैं, लेकिन सिर्फ सांख्यिकी आंकड़ों के लिहाज से, सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) की दृष्टि से ही अग्रणी स्थान हासिल करना पर्याप्त नहीं है।’

राष्ट्रपति ने कहा कि विकास की अवधारणा अब बदल चुकी है। विश्व बैंक और अंतरराष्ट्रीय मुद्राकोष (आईएमएफ) जैसे अंतरराष्ट्रीय संगठन अब विकास के मामले में जीडीपी के साथ-साथ जीएनएच मानदंडों की भी बात करने लगे हैं। मुखर्जी ने कहा कि जीडीपी के साथ जीएनएच विकास का एक महत्वपूर्ण पक्ष है। उन्होंने देश में की बेरोजगारी को लेकर चिंता जताई।

मुखर्जी ने कहा कि 60 करोड़ युवा रोजगार बाजार में उतर रहे हैं, लेकिन वे रोजगार पर रखे जाने की पर्याप्त योग्यता नहीं रखते है। उन्होंने कहा, ‘वे शिक्षित हैं, लेकिन रोजगार पर रखे जाने योग्य नहीं बन पाएं हैं। रोजगार पर रखने जाने की योग्यता की दृष्टि से वे वैश्विक मानदंडों के अनुरूप नहीं हैं।’ मुखर्जी ने कहा कि कौशल विकास की बात देखने में आकर्षक भले नहीं लगती हो पर भारत के संदर्भ में यह बहुत ही महत्वपूर्ण बात है।

गुणवत्ता पर जोर देते हुए राष्ट्रपति ने कहा कि शिक्षा और प्रशिक्षण में अंतरराष्ट्रीय मानक बनाए रखना महत्वपूर्ण है, ताकि भारतीय युवा दुनिया में कहीं भी रोजगार पा सकें। उन्होंने कहा,‘आईआईटी में 100 प्रतिशत कैंपस भर्ती होती है। आईआईटी में पढ़े लोग दुनिया भर में बहुराष्ट्रीय कंपनियों में बड़े पदों पर काम कर रहे हैं।’

उन्होंने कहा कि डॉ. बी आर आंबेडकर स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स भी स्थानीय नहीं बल्कि ‘अंतरराष्ट्रीय स्तर का होगा।’ उन्होंने स्कूल का नाम डॉ आंबेडकर पर रखे जाने पर खुशी जताई जो कि लंदन स्कूल ऑफ इकनॉमिक्स के ‘होनहार छात्र’ रहे। कर्नाटक के मुख्यमंत्री सिद्धारमैया, केंद्रीय मंत्री अनंत कुमार और डी वी सदानंद गौड़ा, राज्य के राज्यपाल वाजुभाई वाला भी कार्यक्रम में मौजूद थे।

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