J&K: घाटी में आतंकियों के खिलाफ छिड़ा सबसे बड़ा ऑपरेशन, चार हजार जवान मैदान में

आतंकियों के पूरी तरह से खात्मे के लिए सेना ने घाटी में अभूतपूर्व अभियान छेड़ दिया है। कश्मीर के शोपियां जिले में 4 हजार से ज्यादा जवान उतारे गए हैं। इसके अलावा, हेलिकॉप्टर और ड्रोन आसमान से नजर रखे हुए हैं। जो सुरक्षाबल मैदान में हैं, उनमें आर्मी, पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवान शामिल हैं। सेना के एक अफसर के मुताबिक, घाटी में बीते एक दशक में छेड़ा गया यह सबसे बड़ा ऑपरेशन है। इन जवानों ने गुरुवार को करीब 20 गांवों को खाली कराया और तलाशी अभियान शुरू किया।

स्थानीय बाशिंदों ने पहले की तरह ही सुरक्षाबलों पर पत्थर बरसाए। सैनिकों के लिए काम कर रहे एक टैक्सी ड्राइवर की मौत हो गई। टकराव में घायल हुए दर्जनों लोगों को श्रीनगर के अस्पताल ले जाया। घायलों में तुर्क वंगम का 20 साल का शाहिद अहमद और सुगन गांव का 15 वर्षीय बिलाल अहमद डार भी शामिल है। इनकी आंखों में पेलेट गन की वजह से चोटें आई हैं।

वहीं, आतंकियों ने इमाम साहिब के नजदीक 62 राष्ट्रीय राइफल्स की एक गश्ती टुकड़ी पर हमला किया। सूत्रों के मुताबिक, इस हमले में तीन सैनिक घायल हो गए। एक सीनियर इंटेलिजेंस अफसर ने बताया कि हाल ही में यहां के बागों में टहलते 30 आतंकियों का विडियो वायरल हो गया था। आतंकियों के सफाए का ऑपरेशन छेड़ने के लिए यह विडियो ही बड़ी वजह बना। उधर, जम्मू-कश्मीर पुलिस ने संदिग्ध हिजबुल आतंकी उमर माजिद पर दस लाख रुपये के इनाम का ऐलान किया है। बीते हफ्ते कैश वैन पर हुए हमले में दो बैंक कर्मचारी और पांच पुलिसवालों की मौत के पीछे उमर का ही हाथ है।

सैनिकों ने ऑपरेशन के तहत घर-घर जाकर तलाशी ली। 90 के दशक के बाद सेना ने ऐसा करना बंद कर दिया था। सैनिकों ने गांववालों से कहा कि वे घरों से निकलकर एक कॉमन एरिया में इकट्ठा हो जाएं ताकि उनके घरों की तलाशी ली जा सके। एक अधिकारी के मुताबिक, खबर मिली थी कि इस इलाके में कुछ स्थानीय और विदेशी आतंकी छिपे हैं। बाद में सुरक्षाबलों ने ‘रिवर्स स्वीप’ ऑपरेशन चलाया ताकि आतंकी दोबारा से वापस न आ जाएं। सैनिकों ने कुलगाम जिले के खुदवानी ने लश्कर आतंकियों की मौजूदगी की खबर पाकर जाल भी बिछाया, लेकिन स्थानीय लोगों की मदद से आतंकी भागने में कामयाब रहे।

ऐसे छेड़ा जाता है अभियान
अशांति की जड़ वाले इलाकों से तलाशी के जरिये उपद्रवी तत्वों को निकालने की मुहिम 90 के दशक में घाटी में आम थी। इसके तहत किसी भी इलाके को घेरकर उसकी नाकेबंदी कर दी जाती है। घेरे गए इलाके में बाहर से कोई शख्स नहीं आ सकता और न ही अंदर से कोई शख्स बाहर जा सकता है। कुछ विशेष मामलों को छोड़कर अमूमन जो जहां है, उसे अभियान खत्म होने तक वहीं रहना पड़ता है।

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