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चीन की सीमा पर क्या होने वाला है बड़ा, जानें क्यों भारत ने कर दी मिसाइलों और टैंकों की तैनाती

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रक्षामंत्री राजनाथ सिंह के साथ सेना के जवान और अधिकारी (प्रतीकात्मक फोटो)

India VS China @ LAC Laddakh: भारत और चीन की सीमा पर आखिर अचानक इतनी हलचल क्यों है, क्या पूर्वी लद्दाख से लगी वास्तविक नियंत्रण रेखा (LAC) पर कुछ बड़ा होने वाला है?…आखिर भारत को क्यों पूर्वी लद्दाख में अचानक मिसाइलों और टैंकों की तैनाती करनी पड़ी है?…क्या चीन फिर से भारत के साथ कोई घात लगाने की फिराक में था, जिसके बारे में सेना को इस बार पहले ही पता चल गया, जिसकी वजह से अचानक सीमा पर टैंकों, तोपों और मिसाइलों की तैनाती बढ़ने लगी है?…क्या चीन एक बार फिर गलवान घाटी जैसी घटना को दोहराना चाहता है, आखिर चीनी सेना अभी तक एलएसी के विवादित क्षेत्रों से पीछे क्यों नहीं हटी ?…यह सवाल सिर्फ आपके जेहन में ही नहीं, बल्कि भारतीय सेना के दिमाग में भी है। इसीलिए अब सेना ने चीन को मुंहतोड़ जवाब देने की तैयारी कर ली है।

भारतीय सेना पूर्वी लद्दाख में आर्टिलरी गन से लेकर स्वार्म ड्रोन, अत्याधुनिक टैंकों और लेजर गाइडेड मिसाइलों की तैनाती को बढ़ा रहा है। दरअसल भारत अब चीन को गलवान घाटी जैसी घटना को दोहराने का मौका नहीं देना चाहता। पूर्वी लद्दाख में कुछ महीने पहले भारत और चीन के बीच विवादित क्षेत्रों से सेना की तैनाती कम करने का फैसला किया गया था। भारत ने तो अपनी सेना हटा ली थी,मगर चीन से सिर्फ दिखावे के लिए कुछ सैनिकों को ही हटाया था। देश के चीफ ऑफ डिफेंस स्टाफ (सीडीएस) ले. जनरल अनिल चौहान ने भी अभी कुछ दिन पहले ही कहा था कि सीमा के विवादित क्षेत्रों से चीनी सेना अभी पूरी तरह पीछे नहीं हटी है। लिहाजा भारतीय सेना भी सुरक्षा के मद्देनजर सभी जरूरी और एहतियाती कदम उठा रही है। इसके बाद से ही अब सीमा के विवादित क्षेत्रों में भारतीय सेना अपनी ताकत को बढ़ा रही है।

एलएसी के विवादित क्षेत्रों पर कब्जा जमाना चाहता है चीन


हाल ही में जारी हुई कई देशों की खुफिया रिपोर्ट में यह दावा किया गया है कि चीन वास्तविक नियंत्रण रेखा पर भारत के विवादित क्षेत्रों में पूरी तरह अपना कब्जा जमाना चाहता है। गलवान घाटी में चीनी सैनिकों द्वारा की गई हरकत भी अचानक और अकारण नहीं थी, लेकिन चीन उस दौरान सफल नहीं हो पाया था। लगातार तीसरी बार चीन के राष्ट्रपति बनने के बाद शी जिनपिंग की ताकत अब और मजबूत हुई है। इसलिए वह विस्तारवादी नीति के तहत भारतीय सीमा से लगे विवादित क्षेत्रों पर कब्जा करना चाहते हैं। खुफिया रिपोर्ट के दावे के अनुसार चीनी सैनिक इसके लिए बार-बार घुसपैठ की घटना को अंजाम दे रहे हैं। रक्षा विशेषज्ञों के अनुसार विदेशों की खुफिया रिपोर्ट के अलावा भारतीय सेना के पास भी इस तरह की खुफिया सूचनाएं हैं। इसलिए भारत भी उसी लिहाज से अपनी तैयारी और क्षमता को बढ़ा रहा है। अब चीन को भारत मुंहतोड़ जवाब देना चाहता है। ताकि बार-बार घुसपैठ करने की चीन हिम्मत भी नहीं कर पाए। इसी उद्देश्य से पूर्वी लद्दाख में अत्याधुनिक और उन्नत युद्धक वाहनों के साथ सेना की संख्या भी भारत बढ़ा रहा है।

स्वदेशी और अत्याधुनिक हथियारों से सेना हो रही लैस

भारत का रक्षा बजट अब दुनिया का सबसे बड़ा तीसरा बजट हो चुका है। पिछले आठ वर्षों में भारतीय सेना की ताकत भी कई गुना बढ़ गई है। यह सब प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के आत्म निर्भर भारत और मेक इन इंडिया से संभव हो पाया है। पीएम मोदी भारतीय सेना को दुनिया की ताकतवर सेना बनाना चाहते हैं। इसीलिए लगातार सेना को अत्याधुनिक देशी और विदेशी हथियारों से लैस किया जा रहा है। बात चाहे थल की हो, जल की हो या फिर नभ की। तीनों ही सेनाओं की बढ़ती ताकत और अत्याधुनिक उन्नत हथियारों की मौजूदगी से अब दुश्मन भी थर्राने लगा है। सक्रिय सैनिकों के मामले में भारत दुनिया की सबसे बड़ी चौथी सेना है।  अभी भी भारत लगातार अपनी सैन्य क्षमता का विकास कर रहा है। पूर्वी लद्दाख में हाई फ्रीक्वेंसी एयर डिफेंस सिस्टम, अत्याधुनिक ड्रोन, लेजर गाइडेड अत्याधुनिक मिसाइलें, आर्टिलरी गन, अत्याधुनिक कार्बाइनें, एफआइसीवी, बीहड़ों, पहाड़ी और दुर्गम क्षेत्रों के लिहाज से विकसित किए गए अत्याधुनिक टैंकों, सर्विलांस की ताकत बढ़ाने के लिए नवीनत हार्डवेयर इत्यादि से सेना को लैस किया जा रहा है।

इंडोनेशिया के बाली में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की औपचारिक मुलाकात से क्या निकला

इंडोनेशिया के बाली में हाल ही में संपन्न हुए जी-20 शिखर सम्मेलन में पीएम मोदी और शी जिनपिंग की डिनर के दौरान औपचारिक मुलाकात हुई थी। जून 2020 में गलवान घाटी की हिंसा की घटना के बाद से यह दोनों नेताओं के बीच पहली मुलाकात थी। इस दौरान दोनों नेताओं ने सिर्फ एक दूसरे का हालचाल पूछा था। इसे आप शिष्टाचार मुलाकात भी कह सकते हैं। क्योंकि इस मुलाकात में न तो कोई गर्मजोशी थी और न ही किसी तरह से रिश्तों के खटास को कम करने की पहल। इससे पहले उज्बेकिस्तान के संघाई सहयो शिखर सम्मेलन में भी सितंबर माह में पीएम मोदी और शी जिनपिंग शामिल हुए थे, लेकिन उन दोनों के बीच किसी तरह की मुलाकात नहीं हुई थी। इससे समझा जा सकता है कि भारत और चीन के रिश्ते बेहद तल्ख चल रहे हैं। गलवान घाटी कि हिंसा में चीनी सैनिकों के साथ हुई झड़प में 20 भारतीय जवान शहीद हुए थे। हालांकि भारत ने करीब 60 चीनी सैनिकों के मारे जाने का दावा किया था। मगर चीन ने इसकी पुष्टि नहीं की थी।

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