Tuesday, May 28, 2024

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तो तारों को भी आती है छींक? ऐसा लगता है मानो फुलझड़ियों की हो रही बारिश, नए शोध में खुलासा

Star Sneeze: क्यूशू विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों ने हाल में ही एक नए शोध में खुलासा किया है कि अपने निर्माण के दौरान ‘शिशु तारे’ या प्रोटोस्टार’ छींकते हैं. इनके छींक में धूल, गैस और विद्युत चुम्बकीय ऊर्जा के प्लम (Plum) डिस्चार्ज होते हैं. उनका मानना है कि इसके जरिए तारों के निर्माण का बारे में काफी कुछ खुलासा होता है.

जब घने और कूल पैच इंटरस्टेलर गैस और धूल बड़े पैमाने पर बादलों में इकट्ठा होते हैं, तो इसे स्टेलर नर्सरी कहा जाता है. सभी सितारे, यहां तक सूर्य भी तारकीय (Steller Nurseries) नर्सरी में जन्म लेते हैं, यह एक गैस और धूल की बड़ी सांद्रता हैं. यह नर्सरी गैस और धूल को एक स्टेलर कोर या “बेबी स्टार” बनाने के लिए समेटती है. इस क्रिया में कुछ गैस और धूल बेबी स्टार के चारों ओर एक रिंग बनाते हैं, जिसे प्रोटोस्टेलर डिस्क कहा जाता है.

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इस शोध के लेखक काज़ुकी टोकोडा ने बेबी तारों के छींक के बारे में बात करते हुए कहा, ‘इन संरचनाओं में चुंबकीय क्षेत्र प्रवेश करते है, जिससे इसमें चुंबकीय प्रवाह होता है, हालांकि यह सभी चुंबकीय प्रवाह लगातार बना रहता है तो स्टार विकसित होता है. जर्नल में शोधकर्ताओं ने MC 27 का अध्ययन किया है, जो कि एक तारकीय नर्सरी है. यह धरती से लगभग 450 प्रकाश-वर्ष दूर स्थित है. यह अब्जर्वेशन चिली में स्थित 66 हाई-क्वालिटी वाले रेडियो दूरबीनों की सहायता से लिया गया था.

टोकोडा ने बताया, ‘हमने अपने डेटा के विश्लेषण कुछ अलग पाया. प्रोटोस्टेलर डिस्क में ‘स्पाइक जैसी’ संरचनाएं थीं. ये चुंबकीय प्रवाह से निकले धूल और गैस के स्पाइक थे. ऐसी घटना को को ‘इंटरचेंज अस्थिरता’ कहा जाता है, जहां चुंबकीय क्षेत्र में प्रोटोस्टेलर डिस्क अस्थिरता गैसों के विभिन्न घनत्वों के साथ प्रतिक्रिया करती है, जिसके परिणामस्वरूप चुंबकीय प्रवाह का एक हिस्सा बाहर निकलता है.’

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तोकुडा ने कहा कि हमने इसे एक बेबी स्टार के ‘छींक’ को डब किया था. यह हमें काफी तेजी से धूल और हवा को बाहर निकालने का याद दिलाता है. वैज्ञानिकों ने प्रोटोस्टेलर डिस्क से थोड़ी दूर भी देखने के बाद पता चलता है कि ये अतीत में अन्य तारों के “छींक” हो सकते हैं.

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शोधकर्ताओं को उम्मीद है कि यह ‘छींक’ उन्हें के गठन की जटिल प्रक्रियाओं को समझने में मदद कर सकते हैं, यह ब्रह्मांड को आकार देने में मदद कर सकते हैं.

Tags: Nasa, Rare Stars, Science, Science news