Aliens On Venus NASA Scientist Claim Life In Solar System Space News

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Life on Venus: सोलर सिस्टम में मौजूद शुक्र ग्रह को पृथ्वी की जुड़वा बहन कहा जाता है. इसकी वजह है ग्रह का पृथ्वी के आकार का होना और ये ग्रह सोलर सिस्टम में रहने योग्य क्षेत्र में मौजूद है. अब शुक्र ग्रह को लेकर कुछ ऐसा दावा किया है, जो आपको हैरान कर देगा. अमेरिकी स्पेस एजेंसी NASA की एक वैज्ञानिक ने दावा किया है कि शुक्र ग्रह पर एलियंस मौजूद हो सकते हैं. उन्होंने इसकी वजह भी बताई है.

शुक्र ग्रह पर तापमान 475 डिग्री सेल्सियस तक पहुंच जाता है. ग्रह का वातावरण बिल्कुल जहरीला है. इस वजह से कोई ये सोच भी नहीं सकता है कि यहां जीवन मौजूद होगा. हालांकि, नासा की वैज्ञानिक डॉ मिशेल थॉलर इसके बिल्कुल उलट सोचती हैं. अमेरिका के गोडार्ड स्पेस फ्लाइट सेंटर में काम करने वाली डॉ मिशेल ने एक नई थ्योरी बताई है, जिसके तहत शुक्र ग्रह पर जीवन मौजूद होने की बात कही गई है. 

एलियंस पर क्या बोलीं डॉ मिशेल थॉलर?

सोलर सिस्टम में दूसरे नंबर पर मौजूद शुक्र ग्रह का वातावरण ऐसा है कि वहां इंसान जिंदा रह ही नहीं सकते हैं. मगर डॉ मिशेल का कहना है कि कॉर्बन-डाई-ऑक्साइड वाले वातावरण में हमने जीवन के संभावित निशान देखें हैं. द सन को दिए एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा, ‘हम शुक्र ग्रह के वातावरण में जीवन के संभावित संकेत देख रहे हैं.’ मैंने शुक्र को लेकर कभी ऐसी उम्मीद नहीं की थी. ग्रह के वायुमंडल ऐसा दिखाई देता है, जैसे इसे किसी बैक्टीरिया के जरिए तैयार किया गया हो.’

उन्होंने आगे कहा, ‘मुझे लगता है कि अब वो वक्त ज्यादा दूर नहीं है, जब हमें सोलर सिस्टम में जीवन के सबूत मिल जाएं. सोलर सिस्टम में मौजूद जीवन बहुत ही छोटा होगा, हो सकता है कि ये बैक्टीरिया के रूप में मौजूद हो.’ दरअसल, ये कहा जाता है कि अगर हमें पृथ्वी के अलावा किसी ग्रह पर जीवन के सबूत मिलेंगे भी तो हो सकता है कि वह किसी बैक्टीरिया की तरह हों. अभी वहां जीवन की बस शुरुआत ही हुई हो. शुक्र को लेकर यही बातें कही जाती हैं. 

कैसा है शुक्र ग्रह? 

शुक्र ग्रह का वातावरण बेहद ही खतरनाक है. अगर किसी इंसान को वहां भेजा जाए, तो उसकी चुटकियों में मौत हो जाएगी. हालांकि, कई सारी स्टडी में ये बात कही गई है कि ग्रह पर बैक्टीरिया के तौर पर जीवन मौजूद हो सकता है. सूरज से शुक्र ग्रह की दूरी 6.7 करोड़ मील है. ये सोलर सिस्टम का सबसे गर्म ग्रह है. इसके वातावरण में सल्फ्यूरिक एसिड और कार्बन डाइऑक्साइड मिला हुआ है. एक तरह से यहां के हालात किसी जहन्नुम से कम नहीं हैं. 

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