Thursday, April 18, 2024

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China Latest News: दक्षिण चीन सागर विवाद और भारत के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा मुद्दे को लेकर चीन ने अपने एशियाई पड़ोसियों के साथ बढ़ते तनावों को तवज्जो नहीं देने की कोशिश जारी रखी है. चीन का कहना है कि ‘बेल्ट एंड रोड इनिशिएटिव’ (बीआरआई) रफ्तार पकड़ रही है और पड़ोसी देशों के साथ व्यापार तेजी से बढ़ रहा है. चीन की संसद, नेशनल पीपल्स कांग्रेस (एनपीसी) के प्रवक्ता लोउ किनजियान ने कहा कि देश के समग्र राजनयिक कार्य में पड़ोसी देशों को उच्च प्राथमिकता दी गई है. उन्होंने एक सवाल के जवाब में यह टिप्पणी की.

उन्होंने कहा, ‘‘हिंद-चीन प्रायद्वीप, मध्य एशिया के सभी देश चीन के साथ साझा भविष्य वाला समुदाय बनाने के लिए प्रतिबद्ध है.’’ लोउ ने कहा, ‘‘आपने दक्षिण चीन सागर का उल्लेख किया. मैं इस बात पर जोर देना चाहता हूं कि चीन अपनी क्षेत्रीय संप्रभुता और समुद्री अधिकारों और हितों की रक्षा करना जारी रखेगा. साथ ही, हम संबंधित देशों के साथ बातचीत और परामर्श के माध्यम से प्रासंगिक मुद्दों से निपटेंगे और संयुक्त रूप से दक्षिण चीन सागर में शांति व स्थिरता की रक्षा करेंगे.’’

चीन दक्षिण चीन सागर के अधिकांश हिस्से पर अपना दावा करता है, जबकि फिलीपीन, वियतनाम, मलेशिया, ब्रुनेई और ताइवान भी इस पर अपना-अपना दावा जताते हैं. हाल के महीनों में, चीन और फिलीपीन के बीच तनाव बढ़ गया है क्योंकि अमेरिका समर्थित मनीला ने दक्षिण चीन सागर के एक हिस्से पर अपना अधिकार जताने के प्रयास तेज कर दिए हैं, जबकि चीनी तट रक्षक जहाजों ने इसका पुरजोर विरोध किया है.

लोउ ने मई 2020 से भारत के साथ पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध का सीधे उल्लेख किए बिना पड़ोसी देशों के साथ चीन के तनाव के बारे में भी बात की. पूर्वी लद्दाख सीमा गतिरोध के चलते जून 2020 में गलवान घाटी में भारत और चीन के सैनिकों के बीच झड़प हुई थी. अमेरिका, भारत, जापान और ऑस्ट्रेलिया के ‘क्वाड’ गठबंधन का परोक्ष रूप से संदर्भ देते हुए लोउ ने कहा, ‘‘चीन गुटीय टकराव का विरोध करता है.’’

उन्होंने कहा कि पड़ोसी देशों के साथ चीन का सहयोग खुला और समावेशी है, विशेष नहीं. उन्होंने कहा कि बीआरआई ने अधिक लाभ पहुंचाए हैं. बीआरआई का उद्देश्य दक्षिण पूर्व एशिया, मध्य एशिया, खाड़ी क्षेत्र, अफ्रीका और यूरोप को भूमि एवं समुद्री मार्गों के नेटवर्क से जोड़ना है.

उन्होंने इस सवाल को भी टाल दिया कि पूर्व अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के दोबारा निर्वाचित होने पर अमेरिका के साथ अपने संबंधों पर पड़ने वाले प्रभाव को चीन किस तरह से देखता है. लोउ ने कहा कि यह अमेरिका का आंतरिक मुद्दा है. ट्रंप ने राष्ट्रपति रहने के दौरान बीजिंग के साथ व्यापार युद्ध शुरू कर चीन से किये जाने वाले आयात पर भारी शुल्क लगाकर बड़े पैमाने पर बीजिंग विरोधी अभियान चलाया था.

यह भी पढ़ें- चीन का सबसे गरीब इलाका कौन सा है? यहां ड्रैगन की अर्थव्यस्था का हर फॉर्मूला फेल

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