Saturday, May 18, 2024

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CJI चंद्रचूड़ ने मां के अनुरोध पर पलटा था अपना फैसला… अब भरी कोर्ट में बोले- नाबालिग का दृष्टिकोण भी जरूरी

नई दिल्‍ली. सुप्रीम कोर्ट ने दुष्‍कर्म के बाद 30 सप्‍ताह गर्भवती हुई नागालिग लड़की को गर्भपात का आदेश देने के बाद अपना फैसला वापस लेने के मामले में सोमवार को अहम टिप्‍पणी की. सीजेआई डीवाय चंद्रचूड़ की बेंच ने कि गर्भावस्था की समाप्ति का फैसला लेने में नाबालिग की सहमति सर्वोपरि  है. अदालती आदेश में कहा गया कि इसलिए गर्भावस्था की समाप्ति का निर्णय लेते समय अगर एक नाबालिग गर्भवती की राय अभिभावक से भिन्न होती है तो गर्भवती व्यक्ति के दृष्टिकोण को ध्यान में रखना चाहिए.

सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि प्रजनन स्वतंत्रता का अधिकार संविधान के अनुच्छेद 21 के तहत एक मौलिक अधिकार है इसलिए गर्भावस्था की समाप्ति का निर्णय लेते समय अगर एक नाबालिग गर्भवती व्यक्ति की राय अभिभावक से भिन्न होती है तो गर्भवती व्यक