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Ex Cec Quraishi Support Sc Observation On Appointment Of Cec Ec – Supreme Court: Cec और Ec की नियुक्ति पर Sc की राय का वीरप्पा मोइली और एसवाई कुरैशी ने किया समर्थन, कही ये बात

निर्वाचन आयोग
– फोटो : Election Commission

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पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री एम.वीरप्पा मोइली और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक परामर्श तंत्र का समर्थन किया। वहीं, चुनाव आयोग के एक दूसरे पूर्व प्रमुख ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक निकाय बनाने की बात पर जोर दिया। 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्त (ईसी) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल किए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या ईसी के रूप में नियुक्ति के लिए कोई तंत्र है और क्या सीईसी के रूप में नियुक्ति के लिए कोई प्रक्रिया है।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह परंपरा के आधार पर किया जाता है। सीईसी की कोई अलग नियुक्ति प्रक्रिया नहीं है। ईसी के रूप में नियुक्ति होती है और फिर वरिष्ठता के आधार पर नियुक्त किया जाता है। 

शीर्ष अदालत ने इसे परेशान करने वाली प्रवृत्ति करार दिया था। न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि उसका प्रयास एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिससे ‘सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति’ को सीईसी के रूप में चुनाव जा सके।  

केंद्र की ओर से इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी पेश हुए। उन्होंने कहा, महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अच्छी नियुक्ति प्रक्रिया रखते हैं, ताकि सक्षमता के अलावा मजबूत चरित्र वाले किसी व्यक्ति को सीईसी के रूप में नियुक्त किया जा सके। 

मोइली ने कहा कि वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। मोइली ने कहा, यदि आप चाहते हैं कि न्यायपालिका और चुनाव आयोग दोनों स्वतंत्र हों, तो सीईसी का कार्यकाल छह साल का होना चाहिए। एक कॉलेजियम द्वारा यह (सीईसी और ईसी की नियुक्ति) किया जाना चाहिए। इसकी मैंने दूसरे प्रशासन आयोग की रिपोर्ट में सिफारिश की थी। 

कुरैशी ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त यह मांग करते रहे हैं। हम कॉलेजियम प्रणाली से परिचित हैं। विभिन्न नियुक्तियां कॉलेजियम द्वारा की जाती हैं। यह राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील है। सीवीसी और सीआईसी राजनीतिक रूप से इतने संवदेनसील नहीं हैं। सीबीआई निदेश के लिए एक कॉलेजियम है। 

एक अन्य पूर्व सीआईसी ने कहा, कानून मंत्री और न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए विपक्षी नेता के साथ एक निकाय होना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-324 को हरी झंडी दिखा दी थी, जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के बारे में बात करता है। कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है।

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पूर्व केंद्रीय कानून मंत्री एम.वीरप्पा मोइली और पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एस. वाई. कुरैशी ने बुधवार को चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के लिए एक परामर्श तंत्र का समर्थन किया। वहीं, चुनाव आयोग के एक दूसरे पूर्व प्रमुख ने सर्वोच्च न्यायालय और उच्च न्यायालयों में न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए एक निकाय बनाने की बात पर जोर दिया। 

दरअसल, सुप्रीम कोर्ट की एक संविधान पीठ ने मंगलवार को मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) और चुनाव आयुक्त (ईसी) की नियुक्ति प्रक्रिया को लेकर सवाल किए हैं। कोर्ट ने केंद्र सरकार से पूछा कि क्या ईसी के रूप में नियुक्ति के लिए कोई तंत्र है और क्या सीईसी के रूप में नियुक्ति के लिए कोई प्रक्रिया है।

इस पर अटॉर्नी जनरल ने कहा कि यह परंपरा के आधार पर किया जाता है। सीईसी की कोई अलग नियुक्ति प्रक्रिया नहीं है। ईसी के रूप में नियुक्ति होती है और फिर वरिष्ठता के आधार पर नियुक्त किया जाता है। 

शीर्ष अदालत ने इसे परेशान करने वाली प्रवृत्ति करार दिया था। न्यायमूर्ति के.एम. जोसेफ की अध्यक्षता वाली पांच न्यायाधीशों की पीठ ने कहा कि उसका प्रयास एक ऐसी व्यवस्था बनाना है, जिससे ‘सर्वश्रेष्ठ व्यक्ति’ को सीईसी के रूप में चुनाव जा सके।  

केंद्र की ओर से इस मामले में अटॉर्नी जनरल आर. वेंकटरमणी पेश हुए। उन्होंने कहा, महत्वपूर्ण बात यह है कि हम अच्छी नियुक्ति प्रक्रिया रखते हैं, ताकि सक्षमता के अलावा मजबूत चरित्र वाले किसी व्यक्ति को सीईसी के रूप में नियुक्त किया जा सके। 

मोइली ने कहा कि वह इसका पूरा समर्थन करते हैं। मोइली ने कहा, यदि आप चाहते हैं कि न्यायपालिका और चुनाव आयोग दोनों स्वतंत्र हों, तो सीईसी का कार्यकाल छह साल का होना चाहिए। एक कॉलेजियम द्वारा यह (सीईसी और ईसी की नियुक्ति) किया जाना चाहिए। इसकी मैंने दूसरे प्रशासन आयोग की रिपोर्ट में सिफारिश की थी। 

कुरैशी ने कहा, मुख्य चुनाव आयुक्त यह मांग करते रहे हैं। हम कॉलेजियम प्रणाली से परिचित हैं। विभिन्न नियुक्तियां कॉलेजियम द्वारा की जाती हैं। यह राजनीतिक रूप से सबसे संवेदनशील है। सीवीसी और सीआईसी राजनीतिक रूप से इतने संवदेनसील नहीं हैं। सीबीआई निदेश के लिए एक कॉलेजियम है। 

एक अन्य पूर्व सीआईसी ने कहा, कानून मंत्री और न्यायाधीशों की नियुक्ति के लिए विपक्षी नेता के साथ एक निकाय होना चाहिए। शीर्ष कोर्ट ने संविधान के अनुच्छेद-324 को हरी झंडी दिखा दी थी, जो चुनाव आयुक्तों की नियुक्ति के बारे में बात करता है। कोर्ट ने कहा कि यह ऐसी नियुक्तियों के लिए प्रक्रिया प्रदान नहीं करता है।




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