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Geeta Dutt 92th Birth Anniversary Know About Geeta And Guru Dutt Love Story – Geeta Dutt: बेहद दर्दनाक है गीता दत्त और गुरुदत्त की प्रेम कहानी, पति-पत्नी के बीच ‘वो’ थी बड़ी वजह

ये बात साल 1930 की है, जब फरीदपुर (अब बांग्लादेश) के जमींदार परिवार में एक नन्ही परी का जन्म हुआ था, जो कि आगे चलकर मशहूर गायकों में शुमार हुई थीं। जी हां हम बात करे रहे हैं गीता दत्त की। जिन्होंने अपने करियर की शुरूआत महज 16 साल की उम्र के कर दी थी। गीता दत्त ने चिन चिन चू, बाबू जी धीरे चलना, आंखों ही आंखों में जैसे सदाबहार गाने गाकर महफिल लूट ली थी। आज गीता दत्त का 92वां जन्मदिवस है। तो चलिए इस खास मौके पर आपको गीता दत्त की जिंदगी से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।

गीता दत्त का जन्म 23 नवंबर 1930 को फरीदपुर (अब बांग्लादेश) में हुआ था। उनका असली नाम था, गीता घोष चौधरी। गीता के 10 भाई बहन थे। 1942 में गीता का परिवार मुंबई चला गया। प्रोफेशनल लाइफ में तो गीता दत्त काफी सफल रहीं और उन्होंने एक से बढ़कर एक गाने गाए थे। निजी जिंदगी की बात करें तो गीता दत्त की पर्सनल लाइफ काफी धुंधली सी रही है। उनकी शादी जरूर मशहूर फिल्म निर्माता गुरुदत्त के साथ हुई थी, लेकिन इनकी कहानी किसी दुखद प्रेम कहानी से कम नहीं थी।

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गुरुदत्त से गीता दत्त की पहली मुलाकात फिल्म बाजी के सेट पर हुई थी। गीता के हंसमुख स्वभाव पर गुरुदत्त दीवाने हो गए थे और गीता भी गुरुदत्त के निर्देशन की कायल हो गई थीं। दोनों का प्यार परवान चढ़ने लगा था। गीता और गुरुदत्त ने शादी का फैसला कर लिया था, लेकिन गीता के परिवार को यह रिश्ता मंजूर नहीं था। बावजूद इसके दोनों ने परिवार के विरोध को दरकिनाकर करते हुए 26 मई 1953 को साधारण तरीके से शादी कर ली। शादी के बाद गीता दत्त के तीन बच्चे तरुण दत्त, अरुण दत्त और नीना दत्त हुए।

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शादी के बाद गुरुदत्त अपने काम में काफी व्यस्त हो गए। वह गीता और परिवार को समय नहीं दे पा रहे थे। इसका असर उनके निजी जीवन पर पड़ा। वहीं गीता परिवार और बच्चों का ध्यान रखती थीं, जिसका असर उनकी प्रोफेशनल जिंदगी पर पड़ने लगा। तभी गुरुदत्त की जिंदगी में एंट्री हुई वहीदा रहमान की। गुरुदत्त ने ही वहीदा रहमान को सीआईडी फिल्म में ऑफर दिया था। इसके बाद वह गुरुदत्त की ही फिल्म प्यासा में नजर आईं। ये फिल्म हिट हुई। दोनों के बीच नजदीकियां बढ़ने लगी थीं। गुरुदत्त और वहीदा रहमान के अफेयर की खबरों से परेशान होकर गीता दत्त बच्चों के साथ अपने माता-पिता के घर चली गई थीं। 

गुरुदत्त और गीता के बीच खूब झगड़े होने लगे थे। हालांकि गुरुदत्त ने रिश्ते सुधारने की एक और कोशिश की। उन्होंने गीता के लिए एक फिल्म शुरु की, लेकिन झगड़े इतने बढ़ गए कि दो दिन बाद ही फिल्म की शूटिंग रोकनी पड़ी। दोनों फिल्म के सेट पर ही लड़ा करते थे। बाद में साल 1964 में गुरुदत्त किराए के फ्लैट में मृत पाए गए थे। कहा जाता हैं कि उन्होंने नींद की गोलियां खाकर आत्महत्या कर ली थी। मीडिया रिपोर्ट के अनुसार गुरुदत्त  की मौत के बाद गीता ने बहुत शराब पीनी शुरू कर दी। 1972 में लिवर की बीमारी के चलते गीता दत्त की भी मौत हो गई। मौत के वक्त वह महज 42 साल की थीं।




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