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Is India Preparing To Get Pok Back? Know The Meaning Of Commander Northern Command Of The Indian Army Statemen – Pok: क्या पीओके वापस लेने की तैयारी में है भारत? जानें सेना की उत्तरी कमान के कमांडर के बयान के कूटनीतिक मायने

क्या पीओके हासिल करने के लिए सेना करेगी कार्रवाई?
– फोटो : अमर उजाला

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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर को लेकर भारतीय सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) को वापस लेने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है। जब भी सरकार आदेश देगी, हम उसपर अमल कर देंगे। इससे भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। 
 
PoK को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तो खूब होती रहती है। नेता बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं, लेकिन सेना के इतने बड़े अफसर की तरफ से पहली बार इस तरह का बयान आया है। इसके पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह भी PoK को वापस हासिल करने के लिए बयान दे चुके हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत PoK को वापस हासिल करने के लिए तैयारी कर रहा है? सेना के कमांडर के बयान का क्या मतलब है? PoK के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या सोचते हैं? आइए जानते हैं… 
 
पहले जानिए सेना के कमांडर ने क्या-क्या बोला? 
दरअसल मंगलवार को उत्तरी सेना के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी मीडिया से बातचीत कर रहे थे। इस दौरान उनसे एक मीडियाकर्मी ने रक्षामंत्री राजनाथ सिंह का जिक्र करते हुए PoK को लेकर सवाल पूछा। इसमें उस बयान का जिक्र किया गया, जिसमें रक्षामंत्री ने कहा था कि हमने अभी जम्मू कश्मीर और लद्दाख की विकास यात्रा शुरू की है। जब हम गिलगित-बाल्टिस्तान तक पहुंच जाएंगे तभी लक्ष्य पूरा होगा।
 
इसका जवाब देते हुए लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी ने कहा, ‘PoK के विषय पर संसद में प्रस्ताव पास हो चुका है, इसमें कुछ भी नया नहीं है। यह संसद के प्रस्ताव का हिस्सा है। सरकार का हर आदेश मानने के लिए सेना तैयार है। सरकार की तरफ से जब भी आदेश होगा, सेना अपनी पूरी ताकत से आगे बढ़ेगी।’ 
 
इस बयान का क्या है मतलब? 
इसे समझने के लिए हमने भारतीय सेना के दो रिटायर्ड अफसरों से बात की। दोनों अफसर कश्मीर में अपनी सेवाएं दे चुके हैं। हालांकि, इस मुद्दे पर दोनों अफसरों की राय अलग-अलग रही। शुरुआत कर्नल जाहिद सिद्दीकी से करते हैं। उन्होंने कहा, ‘उत्तरी कमान के कमांडर के बयान का कुछ गलत मतलब नहीं निकाला जाना चाहिए। ये सही है कि पहले हमारी सेना डिफेंसिव मोड में रहती थी, लेकिन अब प्रो एक्टिव है। लेकिन इसका मतलब ये नहीं कि हम अभी PoK को हासिल करने के लिए कोई हमला करने जा रहे हैं।’
 
कर्नल सिद्दीकी ने आगे कहा, ‘सेना के कमांडर ये संदेश देना चाहते हैं कि उत्तरी कमान की पूरी टीम हर परिस्थिति के लिए तैयार है। अगर आज की तारीख में सरकार आदेश देगी तो वह PoK को हासिल करने के लिए कार्रवाई शुरू कर सकते हैं। मतलब उत्तरी कमान के जवानों के पास पर्याप्त ट्रेनिंग, हथियार, गोला-बारूद व जरूरत के सभी सामान मौजूद हैं। अगर किसी कार्रवाई की स्थिति बनती है तो सेना को इसके इंतजाम के लिए अलग से समय नहीं चाहिए होगा।’
 
वहीं, सेना के एक अन्य बड़े रिटायर्ड अफसर ने नाम न छापने की शर्त पर इस मुद्दे पर अपनी राय दी। जम्मू कश्मीर में लंबे समय तक अपनी सेवाएं दे चुके रिटायर्ड कर्नल ने बताया कि 2014 के बाद से भारतीय सेना में भी बड़ा बदलाव आया है। अब हम सिर्फ डिफेंसिव मोड में नहीं रहते हैं, बल्कि अटैकिंग मोड में रहते हैं। PoK और बलूचिस्तान का मामला सरकार ने पहले ही साफ कर दिया है। देश की संसद में गृहमंत्री इसपर आधिकारिक बयान दे चुके हैं कि एक दिन PoK को वापस भारत हासिल कर लेगा। अब सेना के उत्तरी कमान के कमांडर का बयान आया है। ये भी काफी महत्वपूर्ण है। इसे हल्के में नहीं लेना चाहिए। आने वाले कुछ सालों में हम बड़े एक्शन की उम्मीद कर सकते हैं। 
 
रिटायर्ड कर्नल ने आगे कहा, संभव है कि अगले कुछ समय या साल में PoK पर भारत की कार्रवाई भी शुरू हो जाए। भले ही लिमिटेड वॉर हो। उत्तरी कमान के कमांडर के बयान का भी यही मतलब है कि भारत किसी भी समय इस कार्रवाई को अंजाम देने के लिए तैयार है। 
 
अंतरराष्ट्रीय ताकतों की भी पाकिस्तान पर नजर
रिटायर्ड कर्नल ने कहा, ‘पाकिस्तान इस समय तमाम मुश्किलों से गुजर रहा है। राजनीतिक अस्थिरता के साथ-साथ पाकिस्तान की आर्थिक स्थिति भी काफी खराब है। चीन व अन्य देशों का कर्ज बढ़ गया है। ऐसे में कोई ताज्जुब नहीं होगा अगर आने वाले वर्षों में पाकिस्तान के तीन टुकड़े हो जाएं। जिनमें एक पर चीन कब्जा कर सकता है, जबकि दूसरे पर अफगानिस्तान। बलूचिस्तान में भी माहौल खराब हो चुकी है। इसका फायदा भी भारत को मिलेगा।’  
 
युद्ध के लिए अर्थव्यवस्था का मजबूत होना जरूरी
कर्नल जाहिद सिद्दीकी ने PoK पर फिलहाल किसी भी तरह की कार्रवाई की आशंका को इंकार करते हुए कहा, किसी भी देश को युद्ध लड़ने के लिए मजबूत अर्थव्यवस्था का बैकअप होना जरूरी है। भले ही हमारे पास अभी काफी संसाधन हैं और हम पाकिस्तान पर अटैक कर सकते हैं, लेकिन ये काफी नहीं है। युद्ध शुरू होने के चार से पांच दिन में ही इसका असर पूरे देश पर पड़ने लगेगा। ऐसे में युद्ध से पहले देश की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाना चाहिए। 
 
प्रधानमंत्री से लेकर रक्षामंत्री और गृहमंत्री तक दे चुके हैं बयान
PoK को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी से लेकर रक्षामंत्री राजनाथ सिंह और गृहमंत्री अमित शाह तक बयान दे चुके हैं। 15 अगस्त 2016 को स्वतंत्रता दिवस का भाषण देते हुए पीएम ने लाल किले की प्राचीर से इसका जिक्र किया था। गिलगिट- बाल्टिस्तान, बलूचिस्तान, PoK में नागरिकों पर होने वाले जुल्म का जिक्र करते हुए उन्होंने कहा था, ‘दूरदराज के लोग जिन्हें मैंने देखा तक नहीं। जिनसे मैं मिला तक नहीं, जब ऐसे लोग भारतीय प्राानमंत्री का शुक्रिया अदा करते हैं, उनका अभिवादन करते हैं तो यह देश के 125 करोड़ लोगों का सम्मान होता है।’
 
जम्मू कश्मीर से अनुच्छेद-370 हटाने का विधेयक पेश करते हुए संसद में गृहमंत्री अमित शाह ने भी PoK का जिक्र किया था। उन्होंने कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा था, ‘इस देश का विभाजन कांग्रेस पार्टी ने धर्म के आधार पर करवाया था। जम्मू कश्मीर भारत का अभिन्न अंग है। जब भी मैं जम्मू कश्मीर कहता हूं तो पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) और अक्साई चीन भी इसके अंदर आता है। क्या कांग्रेस PoK को भारत का हिस्सा नहीं मानती है? हम तो इसके लिए जान दे देंगे।’ लोकसभा में चर्चा करते हुए शाह ने कहा था, हमारे एजेंडे में पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर (PoK) भी शामिल है। 
 
हाल ही में चुनावी दौरे पर हिमाचल गए रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने PoK को लेकर नया बयान दिया। उन्होंने कहा था कि पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) पर फैसला भारत और पाकिस्तान के बीच 1971 के युद्ध के दौरान ही ले लिया जाना चाहिए था। अफसोस यह है कि उस समय पाकिस्तान के 90,000 से ज्यादा सैनिक भारत ने बंदी बना लिए थे, इसके बावजूद भारत ने पाकिस्तान से PoK वापस नहीं लिया। वहीं, कांगड़ा में चुनावी रैली के दौरान लोगों ने पीओके चाहिए के नारे लगे। इसपर राजनाथ सिंह ने मंच से कहा- धैर्य रखें, जल्द मिलेगा।  

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पाकिस्तान के कब्जे वाले जम्मू कश्मीर को लेकर भारतीय सेना के उत्तरी कमान के कमांडर लेफ्टिनेंट जनरल उपेंद्र द्विवेदी का बड़ा बयान आया है। उन्होंने कहा कि PoK (पाकिस्तान अधिकृत कश्मीर) को वापस लेने के लिए भारतीय सेना पूरी तरह से तैयार है। जब भी सरकार आदेश देगी, हम उसपर अमल कर देंगे। इससे भारत और पाकिस्तान के साथ-साथ अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी हलचल बढ़ गई है। 

 

PoK को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तो खूब होती रहती है। नेता बड़े-बड़े दावे करते रहते हैं, लेकिन सेना के इतने बड़े अफसर की तरफ से पहली बार इस तरह का बयान आया है। इसके पहले रक्षामंत्री राजनाथ सिंह, गृहमंत्री अमित शाह भी PoK को वापस हासिल करने के लिए बयान दे चुके हैं।

ऐसे में सवाल उठ रहा है कि क्या भारत PoK को वापस हासिल करने के लिए तैयारी कर रहा है? सेना के कमांडर के बयान का क्या मतलब है? PoK के बारे में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी क्या सोचते हैं? आइए जानते हैं… 

 




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