Saturday, March 2, 2024

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Pakistan Election 2024: आर्थिक और राजनीतिक उथल-पुथल से गुजर रहे पाकिस्तान के लिए आज यानी गुरुवार का दिन काफी महत्वपूर्ण है. पाकिस्तान की जनता आज केंद्रीय और प्रांतीय सरकारों के चुनाव के लिए मतदान कर रही है. पाकिस्तान का ये चुनाव कई विवादों के लिए सुर्खियों में रहा है. ऐसा ही एक विवाद चुनाव चिन्ह को लेकर भी हुआ, जब चुनाव आयोग ने देश के पूर्व प्रधानमंत्री इमरान खान की पाकिस्तान तहरीक-ए-इंसाफ पार्टी का चुनाव चिन्ह बल्ला (Bat) ही खारिज कर दिया. अब इमरान की पार्टी के नेता निर्दलीय चुनावी मैदान में हैं और उन्हें मिलने वाले चुनाव चिन्हों को लेकर भी खूब चर्चा हो रही है. 

किसी को बैंगन तो किसी को मगरमच्छ का चुनाव चिन्ह

दरअसल पाकिस्तान में चुनावों के लिए जो चिन्ह उम्मीदवारों को दिए हैं, वो काफी रोचक हैं. राजनीतिक दलों को 150 चुनाव चिन्ह दिए गए हैं तो अन्य निर्दलीय उम्मीदवारों को 174 चुनाव चिन्ह बांटे गए हैं. इनमें गधा गाड़ी (Donkey cart), प्रेस करने वाला बोर्ड, कटोरी, चिकन, बैंगन, जूता, वॉश बेसिन, नेल कटर, मोबाइल फोन चार्जर, सिम कार्ड, पेच, चम्मच, तवा गुब्बारे, घंटी, साइकिल, दूरबीन, बाल्टी, बल्ब, तितली, ऊंट, तोप, कुर्सी, दीया, मगरमच्छ, हाथी, पंखा, मछली, फव्वारा, दरवाजा, गुलेल, प्रेस, जीप, झाड़ू, चाभी, सीढ़ी, कप, बंदूक, अंगूठी, ऑटोरिक्शा, हेलमेट, स्ट्रीट लाइट, तलवार, ट्रैक्टर, टायर, भी चुनाव चिन्ह के तौर पर बांटे गए हैं. 












ये हैं पाकिस्तान के प्रमुख राजनीतिक दलों के चुनाव चिन्ह
नवाज शरीफ की पाकिस्तान मुस्लिम लीग- नवाज पार्टी का चुनाव चिन्ह टाइगर (बाघ) है
बिलावल भुट्टो की पाकिस्तान पीपुल्स पार्टी का चुनाव चिन्ह तीर है
अल्लाह-हू-अकबर तहरीक पार्टी का चुनाव चिन्ह कुर्सी है
आवामी नेशनल पार्टी का चुनाव चिन्ह लालटेन है
बलूचिस्तान नेशनल पार्टी का चुनाव चिन्ह कुल्हाड़ी
जमात-ए-इस्लामी को तराजू का चुनाव चिन्ह दिया गया है
इस्तेहकाम-ए-पाकिस्तान पार्टी का चुनाव चिन्ह चील है
मुत्ताहिदा कौमी मूवमेंट पाकिस्तान का चुनाव चिन्ह पतंग है

चुनाव चिन्ह पर होते रहे हैं विवाद

हाल ही में इमरान खान की पार्टी से बल्ले का चुनाव छिन जाने पर जमकर बवाल मचा था. लेकिन ये पहली बार नहीं था जब चुनाव चिन्ह को लेकर पाकिस्तान में बवाल हुआ हो. चुनावों को लिए दिए गए चुनाव चिन्ह कई बार विवाद का कारण भी बन जाते है. ऐसा ही एक चुनाव चिन्ह ‘कब्र का पत्थर’ भी था. कुछ साल पहले तक निर्दलीय उम्मीदवारों को दिए जाने वाले चुनाव चिन्ह में कब्र पर लगा पत्थर भी शामिल था, लेकिन इसबार विरोध के चलते इसे हटा लिया गया है. दरअसल यूं तो निर्दलीय उम्मीदवारों को चुनाव चिन्ह चुनने का मौका दिया जाता है, लेकिन कई बार रिटर्निंग अधिकारी ही उन्हें चुनाव चिन्ह दे देता है और अटपटे चुनाव चिन्ह उम्मीदवार को परेशानी में डाल देते हैं.

आखिर चुनाव चिन्ह देने की वजह क्या है?

लोकतंत्र में चुनाव एक महत्वपूर्ण प्रक्रिया है. चुनाव के दौरान देश की जनता अपने पसंदीदा उम्मीदवार का चयन करती है. कहीं ये चुनाव वोटिंग मशीन से होते हैं तो कहीं मत पत्र से. इन दोनों ही तरीकों में उम्मीदवार की तस्वीर मतदाता को नहीं दिखाई देती. ऐसे में वो उम्मीदवार के नाम और चुनाव चिन्ह को देखकर वोट करता है. पाकिस्तान के लोग भी अपनी नई सरकार के गठन के लिए आज यानी गुरुवार को वोट डाल रहे हैं. पाकिस्तान एक ऐसा देश है जिसकी 40 फीसदी से ज्यादा आबादी पढ़-लिख नहीं सकती. ग्रामीण इलाकों में तो ये आंकड़ा 50 फीसदी तक पहुंच जाता है. ऐसे में उनके लिए उम्मीदवार की पहचान उसका चुनाव चिन्ह ही हो जाता है.

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