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Taliban Said India May Restart 20 Projects In Afghanistan – Afghanistan: अफगानिस्तान में रुकी हुई 20 परियोजनाओं पर फिर से काम शुरू कर सकता है भारत, तालिबान ने दिए संकेत

सलमा डैम।
– फोटो : ANI

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अफगानिस्तान के तालिबान शासन की ओर से बुधवार को कहा गया है कि अफगानिस्तान में रुकी हुई 20 परियोजनाओं को भारत फिर से शुरू कर सकता है। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के शहरी विकास और आवास मंत्रालय (एमयूडीएच) ने कहा कि भारतीय दूतावास के प्रभारी भारत कुमार ने दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने और अफगानिस्तान में दिल्ली की परियोजनाओं को फिर से शुरू करने में भारत की रुचि व्यक्त की है। कुमार ने अफगानिस्तान के शहरी विकास और आवास मंत्री हमदुल्ला नोमानी के साथ काबुल में बैठक को दौरान यह टिप्पणी की।
 

एमयूडीएच के प्रवक्ता मोहम्मद कमाल अफगान ने कहा कि जो परियोजनाएं पूर्व सरकार के दौरान शुरू की गई थीं, लेकिन राजनीतिक परिवर्तन या अन्य मुद्दों के कारण इसमें देरी हुई, भारत अब इन परियोजनाओं को फिर से शुरू करने में रुचि रखता है।

अर्थशास्त्रियों ने दी अपनी राय
टोलो न्यूज ने बताया कि इस मामले में अर्थशास्त्रियों ने कहा कि उनका मानना है कि परियोजनाओं के कार्यान्वयन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश में विकास को बढ़ावा मिलेगा। अर्थशास्त्री दरिया खान बहीर ने कहा कि इन परियोजनाओं के फिर से शुरू होने से लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं और यह लोगों की आय को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही अफगानिस्तान को राजनीतिक अलगाव से बाहर निकाल सकती है। एक अन्य अर्थशास्त्री नाजकमिर जिरमल ने कहा कि इन परियोजनाओं के फिर से शुरू होने से गरीबी और बेरोजगारी के स्तर में कमी आएगी।

भारतीय व्यापारियों से निवेश का आग्रह
पझवोक अफगान न्यूज ने इस बीच कहा कि शहरी विकास और भूमि मामलों के कार्यवाहक मंत्री मौलवी हमदुल्ला नुमानी ने भारतीय व्यापार समुदाय से अफगानिस्तान के शहरी विकास क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह किया था। मंत्रालय ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि कार्यवाहक मंत्री नोमानी ने काबुल में भारतीय दूतावास के प्रभारी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान कार्यवाहक मंत्री नोमानी ने कहा कि भारतीय व्यवसायी शहरी और आवास क्षेत्र में निवेश कर सकते हैं, विशेष रूप से न्यू काबुल सिटी परियोजना में।

नोमानी ने आगे कहा कि भारत ने अतीत में अफगानिस्तान में कुछ परियोजनाओं को शुरू किया था, लेकिन भुगतान न होने के कारण उनमें से कुछ अधूरी रह गई हैं। उन्होंने भारत सरकार से अधूरी परियोजनाओं के बारे में भी अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। 

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इन परियोजनाओं को फिर से शुरू करने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, गरीबी और बेरोजगारी कम होगी और देश में विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, भारतीय दूत से अफगान इंजीनियरों की क्षमता को और बढ़ाने के लिए अफगान नागरिकों को नागरिक और शहरी विकास के क्षेत्र में मास्टर और पीएचडी डिग्री के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।

भारतीय दूत भरत कुमार ने कहा कि मंत्रालय को सभी उल्लिखित परियोजनाओं के बारे में जानकारी साझा करनी होगी।वह भारत सरकार को उनकी समस्याओं को हल करने और सभी परियोजनाओं को उपयोग के लिए तैयार करने का संदेश देंगे। कुमार ने कहा कि मुझे नई काबुल परियोजना के बारे में कुछ जानकारी मिली है और मैं उनके बारे में भारतीय निवेशकों से भी बात करूंगा।

बता दें कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता की बागडोर संभालने के बाद भारत को अपनी सभी परियोजनाओं को रोकना पड़ा था। इसके बाद भारत ने अपना दूतावास भी बंद कर दिया था। हालांकि दूतावास ने कुछ महीने पहले फिर से कामकाज शुरू किया है। भारत में अभी भी सुरक्षा के मुद्दे हैं क्योंकि हाल ही में संदिग्ध इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों द्वारा कई नागरिक परियोजनाओं, धार्मिक स्थलों और रूसी दूतावास को निशाना बनाया गया था।

विस्तार

अफगानिस्तान के तालिबान शासन की ओर से बुधवार को कहा गया है कि अफगानिस्तान में रुकी हुई 20 परियोजनाओं को भारत फिर से शुरू कर सकता है। टोलो न्यूज की रिपोर्ट के अनुसार, अफगानिस्तान के शहरी विकास और आवास मंत्रालय (एमयूडीएच) ने कहा कि भारतीय दूतावास के प्रभारी भारत कुमार ने दोनों देशों के बीच संबंधों को सुधारने और अफगानिस्तान में दिल्ली की परियोजनाओं को फिर से शुरू करने में भारत की रुचि व्यक्त की है। कुमार ने अफगानिस्तान के शहरी विकास और आवास मंत्री हमदुल्ला नोमानी के साथ काबुल में बैठक को दौरान यह टिप्पणी की।

 

एमयूडीएच के प्रवक्ता मोहम्मद कमाल अफगान ने कहा कि जो परियोजनाएं पूर्व सरकार के दौरान शुरू की गई थीं, लेकिन राजनीतिक परिवर्तन या अन्य मुद्दों के कारण इसमें देरी हुई, भारत अब इन परियोजनाओं को फिर से शुरू करने में रुचि रखता है।


अर्थशास्त्रियों ने दी अपनी राय

टोलो न्यूज ने बताया कि इस मामले में अर्थशास्त्रियों ने कहा कि उनका मानना है कि परियोजनाओं के कार्यान्वयन से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे और देश में विकास को बढ़ावा मिलेगा। अर्थशास्त्री दरिया खान बहीर ने कहा कि इन परियोजनाओं के फिर से शुरू होने से लोगों के लिए रोजगार के अवसर भी पैदा हो सकते हैं और यह लोगों की आय को बढ़ावा दे सकती है। साथ ही अफगानिस्तान को राजनीतिक अलगाव से बाहर निकाल सकती है। एक अन्य अर्थशास्त्री नाजकमिर जिरमल ने कहा कि इन परियोजनाओं के फिर से शुरू होने से गरीबी और बेरोजगारी के स्तर में कमी आएगी।


भारतीय व्यापारियों से निवेश का आग्रह

पझवोक अफगान न्यूज ने इस बीच कहा कि शहरी विकास और भूमि मामलों के कार्यवाहक मंत्री मौलवी हमदुल्ला नुमानी ने भारतीय व्यापार समुदाय से अफगानिस्तान के शहरी विकास क्षेत्र में निवेश करने का आग्रह किया था। मंत्रालय ने अपने ट्विटर हैंडल पर लिखा कि कार्यवाहक मंत्री नोमानी ने काबुल में भारतीय दूतावास के प्रभारी से मुलाकात की। इस मुलाकात के दौरान कार्यवाहक मंत्री नोमानी ने कहा कि भारतीय व्यवसायी शहरी और आवास क्षेत्र में निवेश कर सकते हैं, विशेष रूप से न्यू काबुल सिटी परियोजना में।

नोमानी ने आगे कहा कि भारत ने अतीत में अफगानिस्तान में कुछ परियोजनाओं को शुरू किया था, लेकिन भुगतान न होने के कारण उनमें से कुछ अधूरी रह गई हैं। उन्होंने भारत सरकार से अधूरी परियोजनाओं के बारे में भी अपना रुख स्पष्ट करने को कहा। 

स्थानीय लोगों का भी मानना है कि इन परियोजनाओं को फिर से शुरू करने से रोजगार के अवसर बढ़ेंगे, गरीबी और बेरोजगारी कम होगी और देश में विकास को बढ़ावा मिलेगा। इसके अलावा, भारतीय दूत से अफगान इंजीनियरों की क्षमता को और बढ़ाने के लिए अफगान नागरिकों को नागरिक और शहरी विकास के क्षेत्र में मास्टर और पीएचडी डिग्री के लिए छात्रवृत्ति प्रदान करने का अनुरोध किया गया है।

भारतीय दूत भरत कुमार ने कहा कि मंत्रालय को सभी उल्लिखित परियोजनाओं के बारे में जानकारी साझा करनी होगी।वह भारत सरकार को उनकी समस्याओं को हल करने और सभी परियोजनाओं को उपयोग के लिए तैयार करने का संदेश देंगे। कुमार ने कहा कि मुझे नई काबुल परियोजना के बारे में कुछ जानकारी मिली है और मैं उनके बारे में भारतीय निवेशकों से भी बात करूंगा।

बता दें कि अगस्त 2021 में तालिबान के सत्ता की बागडोर संभालने के बाद भारत को अपनी सभी परियोजनाओं को रोकना पड़ा था। इसके बाद भारत ने अपना दूतावास भी बंद कर दिया था। हालांकि दूतावास ने कुछ महीने पहले फिर से कामकाज शुरू किया है। भारत में अभी भी सुरक्षा के मुद्दे हैं क्योंकि हाल ही में संदिग्ध इस्लामिक स्टेट आतंकवादियों द्वारा कई नागरिक परियोजनाओं, धार्मिक स्थलों और रूसी दूतावास को निशाना बनाया गया था।




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